नियम और ज़रूरी बातें

प्रसाद व्रत रखकर बनाया जाता है। अगर आपकी सेहत साथ दे, तभी प्रसाद बनाने का वादा करें। प्रसाद ग्रहण करने के लिए आप सबका दिल से स्वागत है।

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सेहत सबसे पहले

गर्भवती महिलाएँ, बीमार, बुज़ुर्ग या जो दवा ले रहे हैं, वे व्रत न रखें — बस दर्शन करें और प्रसाद लें। छठी मैया सच्चे मन से ही खुश होती हैं।

2

सात्विक खाना

व्रत और प्रसाद में मांस, शराब, प्याज़ और लहसुन बिल्कुल नहीं। रसोई का सामान अलग और साफ़ रखा जाएगा।

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साफ़-सफ़ाई

रसोई में जाने से पहले हाथ धोएँ और साफ़ कपड़े पहनें। बर्तन, थाली और पूजा की जगह की सफ़ाई का ख़ास ध्यान रखें।

4

समय पर आएँ

संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य तय समय पर होंगे। कृपया 15 मिनट पहले पहुँच जाएँ।

5

दीये और आग से सावधान

दीया, अगरबत्ती और आग के पास बच्चों को अकेला न छोड़ें। बच्चों का ध्यान माता-पिता ख़ुद रखें।

6

कपड़े

पूजा और अर्घ्य के समय साफ़ और पारंपरिक कपड़े पहनें।

7

हाथ बँटाएँ

रसोई, सफ़ाई और सामान में जितनी मदद हो सके, करें — छठ सबके साथ से ही होता है।

8

जगह साफ़ छोड़ें

कार्यक्रम के बाद जगह साफ़ छोड़ें और अपना कचरा साथ ले जाएँ।

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फ़ोटो और वीडियो

फ़ोटो ज़रूर खींचें, पर दूसरों से पूछकर। गैलरी में डालने से पहले उस व्यक्ति की इजाज़त लें।

जय छठी मैया !